बीएमसी और मुंबई पुलिस की भूमिक संस्थागत?ईमानदारी से नियम मानने वालों पर सख्ती, दूसरों पर मौन?
मुंबई: आतिश तिवारी
महाराष्ट्र सरकार ने 24 घंटे दुकान संचालन को लेकर स्पष्ट सरकारी निर्णय (जीआर) जारी किया है। इसके अनुसार, वैध दुकानदारों को नियमों के तहत व्यवसाय की अनुमति है, जबकि बार, पब और वाइन शॉप को अपने लाइसेंस में निर्धारित समय के अनुसार ही संचालन करना होता है। इन पर 24 घंटे दुकान संचालन का नियम लागू नहीं है।
इसके बावजूद, ओशिवारा–लोखंडवाला रोड, समर्थ वैभव बिल्डिंग और तारापुर टावर के पास बीच सड़क पर देर रात तक कारोबार चलता देखा जा रहा है। यह स्थिति कानून के समान और निष्पक्ष पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

वैध दुकानदारों पर सख्ती, सड़क के कारोबार पर नरमी क्यों?
मुंबई में हजारों दुकानदार अपनी पूंजी और कर्ज के सहारे सभी जरूरी लाइसेंस लेकर नियमों के अनुसार व्यवसाय करते हैं, फिर भी समय सीमा के नाम पर उन पर कार्रवाई, नोटिस और जुर्माना आम है। इसके विपरीत, बीच सड़क पर चल रहे अवैध कारोबार पर प्रशासन की चुप्पी दिखाई देती है। यह फर्क साफ करता है कि सवाल कानून के सख्त या नरम होने का नहीं, बल्कि उसके चयनात्मक और असमान क्रियान्वयन का है

जब नियमों का पालन करने वाले दुकानदारों पर सख्ती होती है और सड़क पर चल रहे व्यवसाय पर चुप्पी रहती है, तो यह कानून-व्यवस्था के एकतरफा क्रियान्वयन को दर्शाता है। कानून का उद्देश्य डर नहीं, बल्कि न्याय और समानता सुनिश्चित करना है।
‘बाबा’ नाम से चर्चित व्यवसाय पर गंभीर प्रश्न
ओशिवारा–लोखंडवाला रोड पर रात भर चलने वाला यह कारोबार ‘बाबा’ नाम से चर्चित व्यवसाय के रूप में जाना जाता है। यहां मुद्दा किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस व्यवसाय का है, जो सरकारी आदेशों, नियमों और प्रशासनिक नियंत्रण को खुलेआम चुनौती देता दिखाई दे रहा है।
अब यह आवश्यक हो गया है कि बीएमसी और मुंबई पुलिस स्पष्ट करें कि सड़क पर चल रहे इस कारोबार को किस नियम के तहत अनुमति है और कानून सभी पर समान रूप से कैसे लागू किया जा रहा है।

