
मुंबई आशीष सिंह
मुंबई महानगरपालिका चुनाव के मतदान में अब महज एक सप्ताह का समय शेष है। शहर में सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों का प्रचार चरम पर है, लेकिन इसी बीच पालिका प्रशासन और उसकी आईटी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि तकनीकी दिक्कतों का हवाला देकर उम्मीदवारों की शपथपत्रें (एफिडेविट) मुंबईकर मतदाताओं को उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।

पालिका की आईटी प्रणाली की सुस्ती के कारण मतदाताओं को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि किस उम्मीदवार की कितनी संपत्ति है, उनकी शैक्षणिक योग्यता क्या है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज है या नहीं। जब मतदाताओं से ऐसी बुनियादी और जरूरी जानकारी छिपाई जा रही है, तो 75 हजार करोड़ रुपये के मुंबई महानगरपालिका के बजट का क्या औचित्य रह जाता है, ऐसा सवाल अब खुले तौर पर उठाया जा रहा है।
राज्य की सभी 29 महानगरपालिकाओं की जिम्मेदारी है कि चुनाव से जुड़ी सारी जानकारी एक ही स्थान पर मतदाताओं तक पहुंचाई जाए। मुंबई के मामले में यह जानकारी महानगरपालिका की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होनी चाहिए थी। हालांकि, वास्तविकता यह है कि मुंबई महानगरपालिका की ओर से दोबारा मतदाता सूची से लेकर अंतिम उम्मीदवारों की सूची और उनके शपथपत्रों तक, लगभग हर जानकारी देरी से वेबसाइट पर डाली गई है।
शनिवार, 3 दिसंबर की देर रात अंतिम उम्मीदवारों की सूची घोषित होने के बावजूद अब तक उम्मीदवारों की शपथपत्रें वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई हैं। मतदान केंद्रवार मतदाता सूचियां तैयार होने के बावजूद वे भी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। प्रशासन का तर्क है कि मुंबई में विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 1700 उम्मीदवार होने के कारण जानकारी अपलोड करने में समय लग रहा है और अतिरिक्त तकनीकी दबाव के चलते वेबसाइट प्रभावित हो सकती है।
इस स्थिति में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या समय पर जानकारी उपलब्ध न कराना चुनाव आयोग के नियमों के तहत अपराध की श्रेणी में आता है या नहीं। चुनाव अधिकारियों के कार्यालयों को उम्मीदवारों की शपथपत्रें मिल चुकी हैं और यह जानकारी पालिका को भी भेज दी गई है, लेकिन अब तक तकनीकी विभाग की ओर से इसे वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है।
इस पूरे मामले में चिंता की बात यह है कि संबंधित अधिकारी यह स्पष्ट करने से भी बच रहे हैं कि यह जानकारी कब तक उपलब्ध होगी या होगी भी या नहीं। ऐसे में पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया पर गंभीर सवालचिह्न खड़ा हो गया है।

