महाराष्ट्र में हो गया बड़ा खेला! BJP-शिंदे ने रचा ऐसा चक्रव्यूह, ठाकरे ब्रदर्स के छूटे पसीने
रिपोर्टर आशीष सिंह
सपनों की नगरी मुंबई में इस वक्त सियासत का ऐसा समंदर उमड़ रहा है कि हर कोई दंग है। देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बीएमसी (BMC) के चुनाव की रणभेरी बज चुकी है और इस बार का मुकाबला किसी हॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से कम नहीं होने वाला।
पिछले कई दशकों से जिस मुंबई महानगर पालिका पर शिवसेना का दबदबा रहा है, उसे छीनने के लिए बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने एक ऐसा मास्टरप्लान तैयार किया है जिसने विरोधियों की नींद उड़ा दी है।
लेकिन कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब डिप्टी सीएम अजित पवार की एनसीपी ने ‘महायुति’ से अलग होने का फैसला किया। उधर, मातोश्री में भी बरसों बाद कुछ ऐसा हुआ है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, दो भाई अब एक साथ आ चुके हैं! आखिर मुंबई के इस दंगल में कौन किसे पटखनी देगा? क्या बीजेपी का 128 सीटों का दांव काम आएगा या ठाकरे भाइयों का मेल शिंदे के लिए काल साबित होगा? आइए जानते हैं बीएमसी चुनाव के इस महा-संग्राम की वो इनसाइड स्टोरी जो अब तक पर्दे के पीछे थी।
बीजेपी और शिंदे का ‘207’ वाला फॉर्मूला
मुंबई नगर निगम के लिए महायुति के भीतर सीटों का बंटवारा लगभग फाइनल हो चुका है, लेकिन इस बार अजित पवार का गुट इस खेल से बाहर नजर आ रहा है। खबर है कि बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने आपस में मिलकर 207 सीटों पर सहमति बना ली है। बीजेपी के मुंबई अध्यक्ष अमित साटम ने इस गुप्त रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि बीजेपी 128 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है, जबकि शिंदे की शिवसेना के खाते में 79 सीटें गई हैं। हालांकि, अभी भी 20 सीटों पर पेच फंसा हुआ है। इन 20 सीटों पर फैसला खुद सीएम एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस लेंगे। अजित पवार का महायुति से अलग होकर चुनाव लड़ना इस बात का संकेत है कि मुंबई की जंग अब सिर्फ दो तरफा नहीं, बल्कि बहुकोणीय होने वाली है।
ठाकरे भाइयों का ऐतिहासिक मिलन
बीजेपी और शिंदे की घेराबंदी को तोड़ने के लिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने अपनी पुरानी कड़वाहट भुलाकर हाथ मिला लिया है। दोनों भाइयों ने एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह साफ कर दिया कि अब वे मुंबई को किसी भी कीमत पर बीजेपी के हाथ में नहीं जाने देंगे। हालांकि, राज ठाकरे की मनसे और उद्धव की शिवसेना के बीच सीटों का फॉर्मूला अभी तय होना बाकी है, लेकिन चर्चा यह भी है कि शरद पवार की एनसीपी (SP) भी इस गठबंधन का हिस्सा बन सकती है। अगर शरद पवार भी ठाकरे भाइयों के साथ मिल जाते हैं, तो मुंबई की सड़कों पर एक ऐसी राजनीतिक लहर उठेगी जिसे रोकना महायुति के लिए बड़ी चुनौती होगी।
20 सीटों का सस्पेंस: कौन मारेगा बाजी?
पूर्व सांसद राहुल शेवाले ने साफ किया है कि फिलहाल 207 सीटों का मामला सुलझ चुका है, लेकिन बाकी बची 20 सीटों पर सस्पेंस बरकरार है। ये 20 सीटें वही हैं जहां बीजेपी और शिंदे गुट दोनों के दावे मजबूत हैं। अगले दो दिनों में मुंबई की राजनीति में एक बड़ा धमाका होने की संभावना है क्योंकि तभी ठाकरे भाइयों और शरद पवार के गठबंधन की अंतिम घोषणा होगी। मुंबई की जनता इस वक्त खामोश है, लेकिन इस बार का वोट केवल विकास पर नहीं, बल्कि ‘मराठी अस्मिता’ और ‘पॉवर पॉलिटिक्स’ के बीच की जंग तय करेगा।
