मुंबई : आतिश तिवारी
मुंबई के शिवाजी पार्क में स्थित शिवसेना प्रमुख हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे जी की समाधि को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वकील गुणरत्न सदावर्ते ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि इस समाधि के निर्माण के लिए किसी भी प्रकार की आधिकारिक अनुमति प्राप्त नहीं की गई। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है।

गुणरत्न सदावर्ते ने केवल आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि एक खुली चुनौती भी दी है। उनका कहना है कि यदि हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे जी की समाधि को वहां से नहीं हटाया गया, तो वे उसी स्थान पर राजा ढाले और नामदेव ढसाल के स्मारक बनाकर दिखाएंगे। इस बयान ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
सदावर्ते ने राज ठाकरे को भी सीधे तौर पर निशाने पर लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डीजे बजाने के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध स्वीकार नहीं किया जाएगा और किसी भी परिस्थिति में डीजे बजेगा ही। उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि यदि राज ठाकरे ने अपनी भूमिका नहीं बदली, तो उनके निवास के बाहर दीपावली के दौरान की जाने वाली रोशनी (प्रदूषण) को भी बंद करवा दिया जाएगा।
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना के नेता संजय शिरसाट ने सदावर्ते के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे जी की समाधि को महाराष्ट्र की जनता का पूर्ण समर्थन प्राप्त है और इस पर किसी भी प्रकार का विरोध नहीं है। उन्होंने सदावर्ते के बयान को “कवड़ी के बराबर” बताते हुए इसे अनावश्यक और भड़काऊ करार दिया।

शिवाजी पार्क स्थित हिंदूहृदयसम्राट बाळासाहेब ठाकरे जी की समाधि को लेकर उठा यह विवाद अब कानून, राजनीति और जनभावनाओं के बीच टकराव का केंद्र बन चुका है। यदि समय रहते इस पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया, तो महाराष्ट्र की राजनीति में यह मामला और अधिक तूल पकड़ सकता है।

