मुंबई: आतिश तिवारी
ओशिवरा पुलिस ने एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। वर्ष 1994 में दर्ज हत्या के प्रयास और गंभीर हमले के मामले में 31 वर्षों से फरार चल रहे आरोपी हकीम नरसिंग यादव को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी ओशिवरा पुलिस की सतर्क निगरानी, तकनीकी जांच और निरंतर प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।
ओशिवरा पुलिस थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 591/1994 के तहत आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं सहित आर्म्स एक्ट के प्रावधानों में मामला दर्ज था। लंबे समय से फरार आरोपी के खिलाफ मुंबई सत्र न्यायालय द्वारा स्थायी गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया था, लेकिन आरोपी लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस से बचता रहा।
तकनीकी जांच के दौरान आरोपी का वर्तमान मोबाइल नंबर ट्रेस किया गया, जिससे उसकी लोकेशन उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज क्षेत्र में सामने आई। इसके बाद ओशिवरा पुलिस की विशेष निगरानी टीम ने उत्तर प्रदेश जाकर योजनाबद्ध कार्रवाई के तहत आरोपी को हिरासत में लिया। 31 दिसंबर 2025 को की गई यह गिरफ्तारी मुंबई पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

इस सफल कार्रवाई में ओशिवरा पुलिस थाने की टीम की अहम भूमिका रही, जिसमें एपीआई तुषार बाविस्कर, एएसआई सुनील साळुंखे, हेड कांस्टेबल महेश साळोखे, पुलिस कांस्टेबल महेंद्र भोये और पुलिस कांस्टेबल स्वप्नील सोनवणे शामिल रहे। पूरी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई, जिनमें पश्चिम प्रादेशिक विभाग के अपर पुलिस आयुक्त, परिमंडल 9 के पुलिस उपायुक्त, ओशिवरा विभाग के सहायक पुलिस आयुक्त तथा ओशिवरा पुलिस थाने के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
यह मामला न केवल पुराने अपराधों की पुनः जांच की अहमियत को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि कानून से भागना किसी भी आरोपी को स्थायी राहत नहीं दिला सकता। ओशिवरा पुलिस की यह कार्रवाई मुंबई अपराध समाचार में एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है, जहां तीन दशक बाद भी न्याय की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

