महाविकास आघाड़ी पर सवाल: मरोल वार्ड 86 में ज़मीनी कार्यकर्ता अमोल अनिल जाधव को किया नज़रअंदाज़, जनता ने दिया निर्दलीय समर्थन

मुंबई: विशेष संवाददाता

मुंबई के अंधेरी स्थित मरोल क्षेत्र, वार्ड क्रमांक 86 में इन दिनों राजनीति तेज़ गर्माई हुई है। एनसीपी शरद पवार गुट के वर्षों से निष्ठावान, सक्रिय और ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता तथा अंधेरी तालुका अध्यक्ष अमोल अनिल जाधव को पार्टी टिकट न दिए जाने के बाद महाविकास आघाड़ी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी के इस निर्णय के विरोध में अब जनता खुलकर सामने आ रही है और अमोल जाधव को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में समर्थन दे रही है।


अमोल अनिल जाधव की पहचान केवल एक राजनीतिक चेहरा भर नहीं है, बल्कि वे जनता के बीच रहकर सेवा करने वाले एक जुझारू सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। क्षेत्र में उन्हें सम्मानपूर्वक “आरोग्य दूत” कहा जाता है। स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, निःशुल्क मेडिकल कैंप, ज़रूरतमंदों को अस्पताल में भर्ती कराने से लेकर इलाज की पूरी प्रक्रिया तक, अमोल जाधव ने वर्षों तक बिना किसी प्रचार के जनसेवा को प्राथमिकता दी है। गली-मोहल्लों की छोटी से छोटी समस्या हो या आपात स्थिति, वे हर समय जनता के बीच उपस्थित रहे हैं।

वर्ष 2016 में उन्होंने औपचारिक रूप से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी, लेकिन उससे पहले भी वे जीवन कल्याण फाउंडेशन के अध्यक्ष के रूप में सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। उनकी कार्यशैली में निरंतरता, पारदर्शिता और समर्पण साफ दिखाई देता है। इसी कारण मरोल वार्ड में उनकी मज़बूत ज़मीनी पकड़ मानी जाती है।


इसके बावजूद पार्टी द्वारा उन्हें टिकट न दिया जाना कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के लिए निराशाजनक रहा। क्षेत्र के नागरिकों का मानना है कि पिछले कई वर्षों से मरोल वार्ड 86 में अपेक्षित और ठोस विकास कार्य नहीं हो पाए हैं, जिससे जनता में असंतोष बढ़ता गया है। ऐसे में एक सक्रिय और भरोसेमंद कार्यकर्ता को नज़रअंदाज़ करना, पार्टी की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।

टिकट न मिलने के बाद जनता ने खुलकर अमोल जाधव के समर्थन में आवाज़ उठाई। रोज़ाना हो रहे जनसंपर्क अभियानों और बैठकों में नागरिकों ने उनसे आग्रह किया कि वे निर्दलीय रूप से चुनाव मैदान में उतरें। लोगों का कहना है कि अमोल जाधव विकास की नई सोच और नया चेहरा हैं, जिन पर उन्हें पूरा विश्वास है। “पूरा वार्ड आपके साथ है” जैसे नारों के साथ जनता ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि वह केवल नाम नहीं, बल्कि काम करने वाले प्रतिनिधि को चुनना चाहती है।

स्थानीय नागरिकों और कार्यकर्ताओं का यह भी आरोप है कि महाविकास आघाड़ी में अक्सर बाहरी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि वर्षों से संगठन और जनता के लिए काम करने वाले निष्ठावान कार्यकर्ताओं को टिकट से वंचित कर दिया जाता है। इसे आज की राजनीति का सबसे कड़वा सच बताया जा रहा है, जहाँ ज़मीनी संघर्ष के बजाय राजनीतिक समीकरणों को तरजीह दी जाती है।

इस पूरे घटनाक्रम पर क्राइम सर्च से बातचीत में अमोल अनिल जाधव ने कहा कि उनका संघर्ष किसी पद या सत्ता के लिए नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध न्याय के लिए है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य मरोल वार्ड का विकास, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ, स्वच्छता, बच्चों की गुणवत्ता-पूर्ण शिक्षा और नागरिकों को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना है।

जब उनसे यह पूछा गया कि चुनाव जीतने के बाद वे किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होंगे या नहीं, तो अमोल जाधव ने स्पष्ट किया कि जो निर्णय जनता करेगी, वही उन्हें स्वीकार होगा। उन्होंने कहा कि वे जनहित को सर्वोपरि मानते हैं और जनता के विश्वास पर खरा उतरना ही उनका सबसे बड़ा लक्ष्य है।

मरोल वार्ड क्रमांक 86 की यह राजनीतिक लड़ाई अब केवल चुनाव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सवाल बन चुकी है जो निष्ठा और ज़मीनी कार्य को नज़रअंदाज़ करती है। अब अंतिम निर्णय जनता के हाथ में है, क्योंकि लोकतंत्र में असली ताकत सत्ता नहीं, बल्कि जनता का विश्वास होता है।

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