BJP vs BJP: गठबंधन के दौर में पार्टी अपने ही खिलाफ मैदान में? भाजपा की नीति पर उठते तीखे सवाल ? उम्मीदवार को चुनौती ? विपक्षी दलों की चुनौती से ज्यादा भाजपा के भीतर उभरे समीकरण
मुंबई: आतिश तिवारी
आगामी बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के बीच युति घोषित है। ऐसे में सामान्य राजनीतिक अपेक्षा यह होती है कि गठबंधन के तहत सीटों का स्पष्ट तालमेल और एकजुट रणनीति दिखाई दे। लेकिन वार्ड 63 में स्थिति ठीक उलट नजर आ रही है। यहां भाजपा का अधिकृत उम्मीदवार मैदान में है, और भाजपा की ही पूर्व नगरसेविका निर्दलीय रूप से उसी के सामने खड़ी दिखाई दे रही हैं। यहां की चुनावी तस्वीर अब विपक्षी दलों की चुनौती से ज्यादा भाजपा के भीतर उभरे समीकरणों से तय होती नजर आ रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब पार्टी के अपने ही चेहरे पार्टी उम्मीदवार को चुनौती देते दिखें, तो यह न केवल संगठनात्मक समन्वय पर सवाल उठाता है, बल्कि गठबंधन सहयोगी दलों को भी असहज स्थिति में डाल देता है।

वार्ड क्रमांक 63 इस समय मुंबई की राजनीति का सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला वार्ड बन चुका है। यहां मुकाबला अब केवल दलों के बीच सीमित नहीं रह गया है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर उभरे समीकरणों ने चुनावी तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है। वर्ष 2017 के बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में वार्ड 63 से भाजपा प्रत्याशी रंजना पाटिल ने 4,864 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की थी। 2017 से 2022 तक उनके कार्यकाल को वार्ड में संगठनात्मक पकड़ और स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका के तौर पर देखा गया। हालांकि, 2026 के चुनावी परिदृश्य में तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है।

इस बार भाजपा ने वार्ड 63 के लिए नए और युवा चेहरे के रूप में रुपेश सावरकर को उम्मीदवार बनाया है, जबकि पूर्व नगरसेविका रंजना पाटिल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतर चुकी हैं। इस घटनाक्रम ने वार्ड 63 को एक असामान्य और चर्चित ‘BJP Vs BJP’ की स्थिति में ला खड़ा किया है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह स्थिति भाजपा के लिए संगठनात्मक समन्वय और अनुशासन की बड़ी परीक्षा है। एक ओर पार्टी का अधिकृत उम्मीदवार मैदान में है, वहीं दूसरी ओर पूर्व भाजपा नगरसेविका की निर्दलीय मौजूदगी से मतों के संभावित विभाजन की आशंका जताई जा रही है। यही विभाजन इस वार्ड में सत्ता का पूरा गणित बदल सकता है।

इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गुट) के उम्मीदवार देवेंद्र (बाळा) आंबेकर एक अनुभवी और मजबूत दावेदार के रूप में उभरते दिखाईदे रहे हैं। वे 2007 से 2012 के दौरान वार्ड 59 से कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में विजयी रहे थे। इसके बाद 2017 में वार्ड 68 से चुनाव लड़ते हुए उन्होंने 6,226 मत प्राप्त किए, हालांकि उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। इसके अतिरिक्त, वे बृहन्मुंबई महानगरपालिका में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं, जिससे उन्हें महानगरपालिका की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अनुभव की गहरी समझ है।
भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार रुपेश सावरकर को पार्टी का नया, युवा और संगठनात्मक रूप से मजबूत चेहरा माना जा रहा है। संगठन में उनकी पकड़ और नेतृत्व का भरोसा यह संकेत देता है कि भाजपा इस वार्ड में नई ऊर्जा और नई रणनीति के साथ उतरने की कोशिश कर रही है। क्या भाजपा अपने संगठनात्मक समन्वय और अनुशासनात्मक ढांचे के जरिए हालात को नियंत्रित करने में सफल रहेगी।
अब राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि
- ‘BJP vs BJP’ की इस सीधी टक्कर में फायदा किसे होगा?
- क्या भाजपा इस स्थिति से उबरते हुए अपने मतदाताओं को एकजुट रख पाएगी?
- या फिर यह अंदरूनी संघर्ष किसी तीसरे उम्मीदवार के लिए सत्ता का रास्ता खोल देगा?
- या फिर पार्टी का संगठनात्मक कौशल अंतिम क्षणों में तस्वीर बदल देगा।
कुल मिलाकर, वार्ड क्रमांक 63 में बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव 2026
— सत्ता से ज्यादा रणनीति,
— उम्मीदवार से ज्यादा संगठन,
— और जीत से ज्यादा राजनीतिक संदेशकी परीक्षा बनता जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, वार्ड 63 का फैसला सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि BMC चुनाव 2026 में मुंबई की नगर राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम संकेतक साबित हो सकता है।

